Friday, December 9, 2011

सरल वेदान्त -VEDANT-अध्याय -18-सूक्ष्म शरीर -लिंग शरीर- Prof. Basant


           सूक्ष्म शरीर -लिंग शरीर

ब्रह्म सूत्र के चौथे अध्याय  के पहले पाद का दूसरा सूत्र है-              
                लिंगाच्च 
लिंग का अर्थ होता है प्रमाण. वेदों और वेदान्त में लिंग शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए आया है. सूक्ष्म शरीर 17 तत्त्वों से बना है. शतपथ ब्राह्मण-5-2-2-3 में इन्हें सप्तदशः प्रजापतिः कहा है. मन बुद्धि पांच ज्ञानेन्द्रियाँ पांच कर्मेन्द्रियाँ पांच वायु. इस लिंग शरीर से आत्मा की सत्ता का प्रमाण मिलता है. वह भासित होती है. आकाश वायु अग्नि जल और पृथ्वी के सात्विक अर्थात ज्ञानमय अंशों से पांच ज्ञानेन्द्रियाँ और मन बुद्धि की रचना होती है. आकाश सात्विक अर्थात ज्ञानमय अंश  से श्रवण ज्ञान, वायु से स्पर्श ज्ञान, अग्नि से दृष्टि ज्ञान जल से रस ज्ञान और  पृथ्वी से गंध ज्ञान उत्पन्न होता है. पांच कर्मेन्द्रियाँ हाथ, पांव, बोलना. गुदा और मूत्रेन्द्रिय के कार्य सञ्चालन करने वाला ज्ञान.
प्राण अपान,व्यान,उदान,सामान पांच वायु हैं. यह आकाश वायु, अग्नि, जल. और पृथ्वी के रज अंश से उत्पन्न होते हैं. प्राण वायु नाक के अगले भाग में रहता है सामने से आता जाता है. अपान गुदा आदि स्थानों में रहता है. यह नीचे की ओर जाता है. व्यान सम्पूर्ण शरीर में रहता है. सब ओर यह जाता है. उदान वायु गले में रहता है. यह उपर की ओर जाता है और  उपर से निकलता है. सामान वायु भोजन को पचाता है.
हिन्दुओं का लिंग पूजन परमात्मा के प्रमाण स्वरूप सूक्ष्म शरीर का पूजन है. विकिपीडिया आदि में लिंग पूजन को लेकर अनर्गल जानकारी दी गयी 
है उसमें संशोधन आवश्यक है.

2 comments:

  1. इस में बहुत सुंदर लिंग शरीर का वर्णन किया है इसे आम लोग भी समझ सकते हैं Thanks

    ReplyDelete
  2. बहुत ही अच्छा बताया गया है धन्यवाद

    ReplyDelete

कॉस्मिक सीड म्यूटेशन थ्योरी CSMT

संक्षिप्त परिचय (Abstract) CSMT विज्ञान और दर्शन को जोड़ने वाला एक चिंतन है। पारंपरिक विज्ञान मानता है कि दिमाग के विकास के बाद चेतना पैदा ह...